छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के
अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में लीगल एड क्लीनिक की शुरूआत एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री के के मौर्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गयी। उपस्थित विधिक समुदाय को सम्बोधित करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज के निदेशक डाॅ प्रवीण द्विवेदी ने कहा कि विधिक सहायता की अवधारणा युगों से चली आ रही एक सामाजिक व्यवस्था है। हमारे संविधान की प्रस्तावना में यही धारणा स्थापित की गयी है कि हम भारत के लोग एक दूसरे की मदद करेंगे। रविवार की छुट्टी का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति हफ्ते में एक दिन समाज के लिए कार्य करेगा। कानून मे ऐसा माना जाता है कि कानून की जानकारी सबको है। इसलिए सभी को कानून की जानकारी देना विश्वविद्यालय और लाॅ काॅलेजों की जिम्मेदारी है। उन्होने बताया कि लीगल एड क्लीनिक के तहत एक लक्ष्य तय कर रहे हैं कि एक गांव को लेकर लिटिगेशन फ्री विलेज बनाया जाए। छात्र शिक्षक समुदाय शासन और प्रशासन मिलकर ये प्रयास करें। इस प्रयास से न्याय पालिका के मुकदमों का बोझ कम किया जा सकता है। उपस्थित शिक्षक छात्र तथा विधि पेशेवरों को सम्बोधित करते हुए चीफ लीगल डिफेंस काउंसिल अखिलेश कुमार ने बताया कि लीगल एड क्लीनिक एक कानून द्वारा स्थापित व्यवस्था है। इसके तहत विधिक सहायता के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना की गयी है। इसी के तहत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना की गयी है। प्राधिकरण का काम है ऐसे लोगों को जो न्याय से वंचित हैं उनके लिए विधिक सहायता मुहैया कराना। ऐसे लोगों के बीच जाकर उन्हें विधिक सहायता देने के लिए छात्र और शिक्षक समुदाय को प्रयास करना चाहिए। मुख्य अतिथि एडीशनल डिस्ट्रिक्ट जज श्री के के मौर्य ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायक उद्बोधन देते हुए न्याय के लिए प्रयास करने के लिए आह्वान किया। उन्होने कहा कि
अब वर्ष 1987 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना हुई। तब से अब तक जिला तहसील और ग्राम पंचायत स्तर तक लीगल एड क्लीनिक की पहुंच बढाई जा रही है ताकि वंचित तबकों को निःशुल्क विधिक सहायता मुहैया कराई जा सके।
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