हम हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि गुलामी के बंधन तोड़ना ही आज़ादी नहीं है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में स्वतंत्र होना भी उतना ही जरूरी है। सवाल यह है, क्या हम अपनी बुरी आदतों, निर्भरताओं और लतों से सच में आज़ाद हैं? हमें खुद से भी पूछना चाहिए, क्या हम अपनी बुरी आदतों, निर्भरताओं और लतों से सच में आज़ाद हैं? आज बहुत से लोग दिन-रात मोबाइल में डूबे रहते हैं, जंक फूड पर निर्भर हैं या फिर इंद्रियों के वश में जीते हैं। सच्ची स्वतंत्रता का मतलब है, वही सोचना जो हमें और समाज को सुख दे, वही बोलना जो दूसरों का सम्मान बढ़ाए, और वही करना जो सृष्टि को सुंदर बनाए। मतलब साफ है सच्ची आज़ादी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि अपने विचार, आदतों, शरीर और संसाधनों पर नियंत्रण पाना भी है। यदि हम बुरी आदतों, फिजूलखर्ची, लत और भौतिकवादी मानसिकता से मुक्त हो जायं तो ही जीवन में सही मायने में स्वतंत्रता का अनुभव कर सकेंगे।
